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Tuesday, March 5, 2013

बाबाजी और ब्लॉगिंग




बाबाजी शुरू से ऐसे नही थे, बचपन में तो इकड़म टिप-टॉप रहने वाले गोरे चित्ते, सुंदर और सुशील बच्चे थे. ना शरारत करते थे ना मा को कभी परेशान, हमेशा बस अपने हे धुन में रहते. शायद डरते थे बाबाजी किसी से, पिताजी ने बहुत कंट्रोल में रखा था. वो तो अगर वो कक्षा 9 में लटके ना होते बाबाजी तो आज तक समझ ना पाते की यह बकर करना ही उनका स्वाभाविक और इक़मात्र गुड है. खैर उस बारे में कभी खुल के चर्चा करेंगे, आज तो मौका बस बाबाजी की छुपी प्रतिभाओ को दर्शाने का है.
वैसे तब उन्हे बाबाजी के नाम से भी लोग नही जानते थे, यह तो स्याले हॉस्टिल के बुर बक बच्चे थे, जिनके साथ बक चोदि करते करते और अपना ग्यान बताते बताते इन करम जले कल के लौंदो ने सृिकांत मिश्रा का नाम ही बाबाजी रख दिया.

दिमाग़ तेज़ था उनका, बहुत तेज़, बस कमी इतने रह गए की कही और लगता हे नही था, आप बस 10 लोगो के बीच में बैठा दीजिए उन्हे और फिर ग्यान की बातें करा लीजिए. मा कसम, झंडे गाड़ देंगे बाबाजी. बाबाजी की लाइफ का सीधा फंडा था, टाइम आज तक किसी का नही हुआ, स्याले ऐसे बेवफा चीज़ का क्या करना है. जैसे ही टाइम मिले ना, उसका कुछ मत करो, बस तुरंत वेस्ट कर दो. ना पीछे देखो ना आगे, बस कंबक्खत को वेस्ट कर दो. स्याला ना रहेगा बाँस और ना बजेगे बासुरी.

यह बात उस दिन की है जब बाबाजी ने यह निर्णय लिया की अब भाई बहुत हो गया, बहुत बक चोदि  फैला ली हॉस्टिल के गलियारो में, अबा आगे बढ़ने के ज़रूरत है. बहुत टाइम वेस्ट किया खुदका, अब ज़माने का करना है. बाबाजी ने अपना फर्स्ट एअर याद किया, जब बक चोदि के महाग्यता और बाबाजी के परम सीनियर, मामा सिर ने उनके मूह पर धुआ छ्चोड़ते हुए कहा था.

मामा सर : “ छ्होटे, तुझमे मुझे अपना भूत दिखता है, तू स्याला चीज़ शानदार है.”
बाबा: “क्या सिर, ऐसा बोलके तो आपने मेरे आँखो में आँसू ला दिए. देखना गुरुपूर्णिमा को नारियल चढ़ा उँगा आपको.”
मामा सर: “आबे कैसे बात करता है तू, आज मुझे लगता है की जीवन सफल हो गया मेरा, बहन चोद कब से ढूंड रहा था में पापी तेरे जैसा, साला नंगा नाच कर देगा तू दुनिया में, दुनिया हिला देगा तू मेरे लाल. बस इक सही डाइरेक्षन के ज़रूरत है तुझे.”
बाबा: “सर, सही डाइरेक्षन, गुरुदेव वो सही डाइरेक्षन क्या है. क्या करू में अपने प्रसिद्धि बढ़ने के लिए.”
मामा सर: “भोसड़ी के, सही डाइरेक्षन अगर पता होता मुझे तो क्या आज में यहाँ होता, ढूंड वो डाइरेक्षन. वही तुझे बुलंदियों तक ले जाएगा और याद रख, “तू जहाँ जहाँ चलेगा मेरा साया साथ होगा.””
ऐसा बोलते हुए, मामा की आँखे भर आए, और उसी दिन हमारे बाबा भाई ने निर्णय लिया की, मामा का और खुदका सपना पूरा करना ही है बाबा को.

उस दिन के ठीक 3 साल बाद, जब बाबाजी ने बिहारी को इंटरनेट पर फ़ेसबुक ना चलते देखा, तो बाबा भाई से रहा नही गया, और उनके मूह से वो शब्द निकले जिसने उनके संसार को और दुनिया के भविष्य को बदल के रख दिया, वो शब्द थे “ तुम स्याला फ़ेसबुक पे नही हो, आबे यह क्या बक चोदि  फैला रहे हो आजकल.” और फिर क्या था बिहारे ने बाबा को ब्लॉग्गिंग का पूरा ग्यान दिया.

ग्यान सुनते हे बाबा के आँखो के सामने अपने गुरु मामा का गुटका ख़ाता चेहरा नज़र आया, और उन्होने दिव्य दर्शन में बाबा को बोला,”आवे ईएई खो ओम उूवे एह.”. बाबा को कुछ नही समझा और बाबा झल्ला के बोले “कितनी बार बोला सर तुमको गुटका थूक के बोला करो, बहन चोद नही समझ पाते हम”. मामा ने फिर गुटका थूक के बोला,”यही तो हम बोले थे. “यह जो सपना है तेरा, तुझको अब पाना है””. फिर क्या था,बाबा ने आशीर्वाद लिया मामा का और आज उन्होने अपने नयी पारी की शुरुआत की.

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